2. नैतिकता का पतन और सामाजिक विकृति
4. पर्दे के पीछे की कड़वी सच्चाई
एक परिवार में दादा-पोती या नाना-नतिनी का रिश्ता निस्वार्थ प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। जब यही प्रेम अपनी सीमाएं लांघकर 'नाजायज' मोड़ ले लेता है, तो वह केवल एक रिश्ता नहीं टूटता, बल्कि उस मासूम का पूरा संसार उजड़ जाता है। वह सुरक्षा, जो उसे घर की चारदीवारी में मिलनी चाहिए थी, वहीं से डर का जन्म होने लगता है।
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